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अपनी जिंदगी को डिफाल्ट में रखकर न जिएं बल्कि अपनी जिंदगी को अपनी मर्जी की डिजाइन से जिएं ।

मैं हमेशा बड़ी आत्मीयता व कृतज्ञता से धन्यवाद करता हूँ अपने से जुड़े हर व्यक्ति का, अपने दोस्तों का, अपने शिक्षकों का, अपनी पुस्तकों का, अपनी कलम(पेन) का, अपने से जुड़ी हर उस वस्तु का जो मुझे ज़िन्दगी में आगे बढ़ने में मदद कर रही है। मैं शुक्रगुज़ार हूं उन सब लोगों का जिनकी बदौलत मैं आसमान की ऊंचाईयों को छूने के लिए अग्रसर हूँ।

मेरे लिए “जिंदगी अवसरों के झरोखों की एक अनोखी शृंखला है”, जिसे मैं हर पल महसूस करता हूँ।
अधिकांश लोग वास्तव में ही पता नहीं लगा पाते कि जिंदगी क्या चीज है जब तक उनकी मृत्यु उनके दरवाजे पर दस्तक देने नहीं आ जाती । जब उन्हें अपनी नश्वरता का पता चलता है, तब वे जिंदगी के अर्थ की गहराई में उतर पाते हैं और उन्हें पता चलता है कि उन्होंने कितना कुछ अब तक गवां दिया है । जिंदगी इस तरह से बहुत क्रूर हो सकती है । इसके उपहार अधिकांशतया सामने नहीं आ पाते जब तक अंत समय न आ जाए । जब हम अपनी युवावस्था में होते हैं और हमारे सामने जीने के लिए पूरी जिंदगी पड़ी होती है, हम अपने जीने को बाद में देखेंगे कहकर टालने में लग जाते हैं । अगले वर्ष मैं प्रकृति में अपना अधिक समय बिताऊंगा या खूब हसूंगा या खूब प्यार करुंगा ।
अगले वर्ष मैं ओर अधिक विचारकों के साथ समय बिताऊंगा ओर साहित्य की उत्कृष्ट रचनाएं पढ़ूंगा । अगले वर्ष मैं अधिक से अधिक सूर्यास्त देखूंगा और अच्छे मित्र बनाऊंगा । लेकिन फिलहाल तो मुझे बहुत सारे काम करने हैं और पता नहीं कितने लोगों से मुलाकातें करनी हैं । ये सब आज जिस युग में हम जी रहे हैं उस युग के मानक टाल-मटोल बहाने हैं । बहुत अच्छे लेकिन मैं जो जानता हूँ वह यह है कि यदि आप जीवन में सक्रिय नहीं होते तो जीवन में एक विशेष आदत है वह आप पर हावी हो जाता है । और दिन बढ़कर सप्ताह बन जाते हैं, सप्ताह बढ़कर महीने बन जाते हैं और महीने बढ़कर वर्ष बन जाते हैं और फिर एक दिन आपको पता भी नहीं होगा और जीवन का अंत ही आ जाएगा । बुद्धिमत्ता की बात सपष्ट रूप से यही है कि अपनी जिंदगी को डिफाल्ट में रखकर न जिएं बल्कि अपनी जिंदगी को अपनी मर्जी की डिजाइन से जिएं । जिंदगी फिर से शुरू करें और ठोस वास्तविकता को मूर्त रूप देने का काम करना प्रारंभ करें जो आपका मन जानता है, जो आपका निमित्त है । आजसे आप अपनी जिंदगी ऐसे जीना प्रारंभ करें जो आप मृत्यु शैय्या पर होने के समय जीने की सोचते । अथवा अगर हम से मुहावरे में कहना चाहें तो मार्क ट्वेन के शब्दों में- “अपना जीवन आप ऐसे जिएं कि आपकी मृत्यु पर महाब्राह्मण *(मृत्यु संस्कार करनेवाला) भी आंसू बहाए ।”

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