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जीवन क्या है

 जीवन कई अलग-अलग टुकड़ों से जुड़कर बना है। यहाँ सीधा-सरल कुछ भी नहीं है जैसे किसी यात्रा को पूरा करने से पहले हम कई जगह रुककर सुस्ताते चलते हैं। ठीक उसी तरह जीवन यात्रा में भी कई ठहराव कई रूप में मौजूद है। यहाँ लिखा सबकुछ इस जीवन की तरह है जिसे कई टुकड़ों में समेटने की कोशिश की गई है। यहाँ प्रेम की हताशा भी दर्ज है तो अंधकार से बाहर आने की उम्मीद भी। यहाँ इंतज़ार चौखट पर खड़ा है तो किसी को इंतज़ार छोड़ देने की सलाह भी। जब-जब जहाँ जैसा कुछ मिला जीवन में, ठीक अपने लिखे में भी उसे समेटा। लेखक होना एक बेचैन और अशांत मनुष्य होना है। एक नामालूम बेचैनी, कोई अज्ञात-सी तड़प, एक बदहवास-सी छटपटाहट हमेशा साथ चलती है। क्या यह प्रेम की तड़प है या जीवन से मिले अनगिनत दुःखों की ? दूसरों की सुविधा या अपने मन की तसल्ली के लिए कोई इसे प्रेम में मिली पीड़ा या उदासी का नाम दे भी देता है क्योंकि उदासी को भी एक चेहरे, एक नाम की दरकार होती है। वस्तुतः यह लेखन से मिली यंत्रणा है जो एक लेखक के लिए वरदान भी है और अभिशाप भी। रचने की बेचैनी उसे कहीं भी, कभी भी चैन नहीं लेने देती, जब वह रच रहा होता है तब भी और जब राइटर्स ब्लॉक से गुज़र रहा होता है तब भी। उसके अवचेतन में कोई रचना, कुछ शब्द हमेशा ही साथ चलते रहते हैं। उनसे मुक्ति सम्भव नहीं है।



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