हम सबके भीतर चाहे अनचाहे एक तस्वीर छुपी रहती है , जिसे हम ताउम्र ढूँढते , सोचते और लिखते रहते हैं । वो ही हमारी प्रेरणा बनती है , वो ही हमारे शब्द बुनती है ।
हम सबके भीतर चाहे अनचाहे एक तस्वीर छुपी रहती है , जिसे हम ताउम्र ढूँढते , सोचते और लिखते रहते हैं । वो ही हमारी प्रेरणा बनती है , वो ही हमारे शब्द बुनती है ।
कविता लिखना अपने आप में एक सुखद एहसास रहा है । अंतर्द्वंद को जब शब्दों में पिरोया जाता है तो आत्मिक संतुष्टि मिलती है । बहुत कम लोग अपनी भावनाओं , सोच और सपनों को शब्दों में ढाल पाते हैं । जब मैंने लिखना शुरू किया था तब वो खुद ही के लिये था । मगर जैसे जैसे लोग जुड़ते गए ये एहसास हुआ कि आप शब्दों से कितने दिलों को छू पाते हैं । इसलिये ये खजाना सिर्फ अपने तक रखना बेमानी लगता है।

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