दुख को सुख मे बदलने की कला
किसी ने ठीक ही कहा है की ज़िंदगी का रोना भी कोई रोना है, ज़िंदगी रोकर काटो या हँसकर वह तो कट ही जाती है। सुख और दुख ज़िंदगी के खेल है। इन्हे खेल की तरह खेलते हुए चलने का नाम ही ज़िंदगी है। अगर दुखो को नजरंदाज न किया जाये तो जीना मुश्किल हो जाता है। दुख का प्रत्यश रूप जितना बड़ा दिखाई देता है अंदर से वह उतना हो खोखला और कमजोर होता है। अगर विचारो को मजबूत बनाकर रखा जाये तो दुख हवा के झोखे के साथ गायब होने वाले पानी के बुलबुलों की तरह होते है। दुख, तकलीफ, आपदाए इंसान की ज़िंदगी के साथ जुड़ी हुई ऐसी अप्रसंगिक घटनाये है जो क्षति पहुंचाकर हमे विचलित कर देती है। कभी कभी तो अविवेकी इंसान सहनशक्ति के अभाव मे अपने होश खो बैठता है। मुसीबतों को टालने की कोशिश करते हुए भी हमारा मन विचलित हो ही उठता है। आगे बढ़ने के सारे दरवाजे बंद होते देखकर सिर पकड़ कर बैठने के सिवाए कोई ओर रास्ता नजर नहीं आता। आखिर ऐसा क्यो होता है?
कारण यह है की हमारी नकारात्मक सोच और चिंतन हम पर हावी हो जाते है। कहते है की इंसान जैसा सोचता है वैसा ही बन जाता है। अगर सोच सकरात्मक होगी तो दुख मे भी कही न कही सुख की अनुभूति होगी।
प्रकृति ने हमे रास्ता बताया है की दुख तकलीफ़ों के समय रोने, सिर पीटने या डरने की बजाय अपने आप पर, अपने कर्मो(actions) पर विश्वास रखिए जिससे की आगे बढ़ने के लिए शक्ति, प्रेरणा और लक्ष्य मिले। किस्मत भी उन्ही का साथ देती है जिनमे कुछ करने का साहस होता है।
हर दिन एक जैसे नहीं होते। प्रकृति का नियम है की रात के बात दिन जरूर आता है। यहाँ कुछ भी स्थायी नहीं है। बुरे वक्त मे हमे भी सुख रूपी सुबह का खुशी खुशी इंतजार करते रहना चाहिए जो हमारे लिए एक नयी ऊर्जा का निर्माण करती है। दूसरों से तुलना करके अपने भाग्य को कोसने की बजाय अपनी अच्छी बुरी आदतों, कमजोरियों और ताकतों को परखें और हिम्मत न हारकर आगे बढ़ते रहे। यही है खुशहाल ज़िंदगी (happy life) का सबसे बड़ा मंत्र.
हम में से हर इंसान की कुछ मजबुतियाँ(strengths) और कमजोरियां(weakness) होती है. जिस तरह हमारी मजबुतियाँ(strengths) अलग अलग होती है ठीक उसी तरह हमारी कमजोरियां(weakness) भी अलग अलग होती है. हम सभी ने अपने लिए एक आदर्श छवि बना रखी है जिसकी तरह हम बनना चाहते है . हम भी इस घड़े की तरह है जो सिर्फ अपने अन्दर की कमियों(flaws) से होने वाले नुकसान को देखते है और दुखी रहते है जबकि इनसे होने वाले फायदों को देखते हुए भी नजरंदाज करते है. असल में कमजोरियां(weakness) और मजबुतियाँ के लिए सब का अलग अलग नजरियाँ होता है. एक ही चीज किसी के लिए उसकी कमजोरी हो सकती है तो दुसरे इंसान की लिए उसका मजबूत पक्ष. कमजोरी का होना बुरी बात नहीं है. कमजोरी हम सबके अंदर होती है. लेकिन हमें अपनी कमजोरियों को पहचानकर उनको दूर करने की कोशिश करनी चाहिए. साथ ही यह भी बात ध्यान में रखना चाहिए की कुछ चीजे हमारे हाथ में नहीं होती इसलिए हर इंसान को वो जैसा है वैसे ही स्वीकारना चाहिए और अपनी अच्छाई की तरफ ध्यान देना चाहिए.
😊सतनाम कैत
इसी के साथ:-
👉🏻अच्छी किताबें और सचे दोस्त तुरंत समझ में नही आते
👉🏻अपने जीवन में इन्सानो से ज्यादा किताबों को महत्व दो
👉🏻 हमे कभी परिस्थितियों में कभी भी हार नही माननी चाहिये|
👉🏻आज का दिन खराब है तो आशा रखो आने वाला दिन बहुत अच्छा होगा
👉🏻कभी कभी मजबुरियाँ और परिस्थितियाँ रिश्तो को खत्म कर देती है, लेकिन बुरी परिस्थितियों मे अपने दोस्तो, रिश्तेदारो, घर वालो सभी का साथ दो एक स्ट्रौंग इंसान बनकर| क्योंकि आने वाला समय बहुत ही खूबसूरत है |*
👉🏻हमेशा साकारात्मक सोचो तो साकारात्मक परिणाम मिलेंगे|
👉🏻हमे हमेशा हर चीज का धन्यावाद करना चाहिये|
👉🏻प्रकृति की हर चीज अनमोल और खूबसूरत है उसको प्यार करना चाहिये
Please Like My Facebook Page


No comments
Post a Comment