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दुखो की बारिशों में तो हम अकेले थे। जब बरशी खुशियां तो ना जाने ये भीड कहां से आ गई ....

दुखो की बारिशों में तो हम अकेले थे। जब बरशी खुशियां तो ना जाने ये भीड कहां से आ गई ....

दोस्तो जब आप संघर्ष करते हैं, तो शायद ही कोई आपका साथ निभाये और जब आप सफल हो जाते हैं तब अजनबी भी आपके अपने हो जाते हैं । आपके सबसे प्रिय होने का दावा करने लगते हैं। सब आपकी वाहवाही करते हैं उन्हे दिखती हैं तो सिर्फ आपकी सफलता। उन्हे मतलब हैं तो सिर्फ आपकी शोहरत से। वो ये कभी नहीं जानना चाहेंगे कि इस बुलंदी तक पहूचने के लिये आपने कितने पापड बेले हैं ..
कितनी रातों की नींद हराम की हैं कितनी रातों को आप भुखे पेट सोये हैं इनसे उन्हे कोई मतलब नहीं हैं .उन्हे दिखती हैं तो सिर्फ आपकी सफलता।

दोस्तो बहुत अजीब हैं ये दुनियां ,अजीब हैं ये ज़िंदगी और बड़े अजीब हैं यहां के लोग ...

जब आप सफल हो जाते हो तो लोग यहां तक कहते हैं की यदि आप कचरा भी बीनते तब भी मैं आपसे इतना ही प्यार करता या करती ..लेकिन वास्तविक्ता तो ये हैं कि जब आप गरीब होते हैं संघर्ष कर रहे होते हैं। तब लोग आपकी तरफ देखना भी पसंद नहीं करते हैं और आपसे बात करना वो खुद का अपमान समझते हैं ..
और जब आप सफल हो जाते हो तब बधाईयों का तांता बंध जाता है। लोगो का ज़मघट आपके दारवाजे पर होता हैं।

कितना अजीब लगता होगा उस व्यक्ती को जब वो भुखा पेट रहता था तब उसे किसी ने खाने के लिए भी नहीं पुछा और जब वो खुद की मजबूरियों पर रोता था तब तो कोई उसे ढ़ांड्स बधाने नहीं आया। तब कोई उसकी आँखो से आंशु पोछने नहीं  आया और आज बड़े हमदर्द बने फिरते हैं।

ये हैं दुनियां की वास्तविक्ता ..
तो मित्रों आपको खुद ही आपकी ज़िन्दगी को जनंत बनाना पड़ेगा। लोग तो आपके साथ तब आएंगे जब आप सफल हो जायेंगे।

माना की दर्द -ए -जहाँ का इक कतरा तेरे  भी  नसीब मेँ है
मगर तू इसे बदनसीबी ना समझ ...संघर्ष-ए-दौर खुशनसीबों को ही नसीब होता है

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