जीवन की डगर में कुछ ख्वाहिशें
वैसे तो मुझे बंदिश लगाना पसंद नही है और ना ही मेरी रोक टोक करने की आदत है पर मेरी कुछ मासूम सी ख्वाइशें है जिनको तुम्हे मानना ही पड़ेगा, जैसे की तुम बाल लम्बे ही रखोगी, तुम साड़ी पहनना ज़रूर सीखोगी, आंखों में हल्का सा काजल ज़रूर रखोगी, मेंहदी लगाया करोगी माथे पे छोटी सी बिंदी लगाया करोगी, मैं अगर कभी थक जाऊं जीवन की भाग दौड़ में तो मेरे लिए चाय बनाते हुए अदरक डालना भूलोगी नही, अगर तुम्हारे बाल की कोई लट तुम्हारे माथे पर आएगी तो तुम उसे मुझे तुम्हारे कान के पीछे करने दोगी और मैं जानता हूं के तुम्हे पता है के मुझे कुछ खरीदना नही आता मगर फिर भी जो झुमके मैं तुम्हारे लिए लाऊं तुम उन्हें जरूर पहना करोगी और आख़िर में सिर्फ इतना के मुझे कभी छोड़ के नही जाओगी।

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