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हरे धुंध की साँस लेने की तकनीक

इस तकनीक की खोज पूरब के विश्व-स्तरीय मार्शल आर्टिस्टों ने की । उनका मकसद प्रतिस्पर्द्धा से पहले पुरसुकून और परमशांति की स्थिति प्राप्त करना था ।
एक स्वस्थ श्वसन-क्रिया का पहला सिद्धांत यह है कि श्वसन क्रिया के दौरान फेफड़े का पूरा उपयोग हो न कि उसके सिर्फ शीर्ष हिस्से का । स्वस्थ श्वसन क्रिया में फेफड़े का ऊपर से नीचे तक पूरा उपयोग होता है । जैसा कि जब आप नींद में होते हैं, तभी हो पाता है ।
अब आप एक शांतिपूर्ण स्थान पर पीठ के बल लेट जाएँ और अपनी आँखें बंद कर लें । निम्न वाक्यांश को ऊँची आवाज में धीरे-धीरे दोहराएँ : 'मैं बिलकुलशांत-चित्त, शक्तिशाली और ध्यान-केंद्रित हूँ ।' फिर, जब आप श्वास लें, तब कल्पना करें कि नाक के रास्ते गहरे हरे धुंध के रूप में हवा आपके पेट में प्रवेश कर रहा है । यह हरा धुंध अंगों और पूरे शरीर में संचारित हो रहा है । आगे, शांतिदायक हरा धुंध पूरे शरीर में संचारित हो जाता है, और मांसपेशियों को आराम महसूस होने लगता है, तब साँस छोड़ दें, इसके साथ अंदर जमा सारा तनाव बाहर निकल जाता है ।
गहराई से सांस लेने का यह व्यायाम रोजाना ५ से ५० मिनट करें विशेषकर हर सुबह या फिर किसी तनावपूर्ण दशा में । इससे तत्काल सुकून और शांति प्राप्त होती है । गहरी श्वसन-क्रिया आपके दिलो-दिमाग और जीवन के रंग-ढंग को बदल देता है ।

उपर्युक्त श्वसन-विधि शारीरिक,मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए सर्वाेत्तम श्वसन व्यायाम है । इससे महज ३० दिनों में अपने सामान्य स्वास्थ्य को बेहतर बना सकते हैं । आपको रोजाना केवल १०-१५ मिनट बिताना है, मगर फायदा बेशुमार है । फिर अपने महत्वपूर्ण कार्याें को पहले से ज्यादा जोश और उत्साह से निबटा सकते हैं । गहरी श्वसन- क्रिया से आपमें ऊर्जा का भंडार बनता है जिससे आप ज्यादा कुछ कर सकते हैं, ज्यादा उपलब्धियाँ हासिल कर सकते हैं, और अपनी जिंदगी को स्वर्ग बना सकते हैं ।

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