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हम हमेशा अपने युवाओं का भविष्य निर्माण नहीं कर सकते, लेकिन हम भविष्य के लिए अपने युवाओं का निर्माण कर सकते हैं

किसी भी राष्ट्र के युवा उसकी संपन्नता के रखवाले होते हैं। विकसित दुनिया के अधिकतर देश बूढ़ी होती जनसंख्या वाले राष्ट्र बनते जा रहे हैं, लेकिन भारत 2020 तक दुनिया का सबसे युवा देश बनने जा रहा है। भारत की आबादी में लगभग 40 प्रतिशत हिस्सेदारी वाली यह युवा शक्ति सबसे जीवंत और गतिशील वर्ग तो है, हमारे देश का सबसे कीमती मानव संसाधन भी है। दुनियाभर के अर्थशास्त्री और नीति निर्माता भारत के जनांकिकीय लाभांश की बात करते आ रहे हैं। देश के भविष्य के रूप में युवाओं को राष्ट्र निर्माण में अद्भुत भूमिका निभानी है। उनका रचनात्मक सामर्थ्य, उत्साह, ऊर्जा और बहुमुखी प्रतिभा किसी भी देश के लिए आश्चर्यजनक परिणाम दे सकती है।
इंजीनियर, चिकित्सक, वकील, बैंकर, उद्यमी, खिलाड़ी के रूप में युवाओं के भीतर सभी क्षेत्रें में देश का नेतृत्व करने की क्षमता है। उन्हें सही दिशानिर्देश और संसाधन प्रदान कर सशक्त बनाने की आवश्यकता है ताकि वे वृद्धि कर सकें और देश के विकास में योगदान कर सकें। बच्चे को स्वस्थ विकास एवं अच्छी शिक्षा वाला अनुकूल घरेलू वातावरण प्रदान करना इस दिशा में पहला कदम है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 इसे सुनिश्चित करने की दिशा में निर्णायक क्षण है। सर्व शिक्षा अभियान, ई-पाठशाला, उड़ान आदि सभी स्तरों पर गुणवत्तायुक्त शिक्षा प्रदान करने वाले प्रमुख सरकारी कार्यक्रम हैं। देश के पर्वतीय और सुदूरवर्ती क्षेत्रें, जहां अच्छी शिक्षा प्राप्त करना समस्या है, में दूरस्थ शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हमारे युवाओं तक शिक्षा को पहुंचाने में दूरस्थ शिक्षा के मूल्य को अब मान्यता दी जा रही है। ज्ञान, स्वयं एवं राष्ट्रीय डिजिटल पुस्तकालय जैसे विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए बेहतर तरीके से शिक्षा प्रदान करने में प्रौद्योगिकी का प्रयोग किया जा रहा है।
किंतु इस शिक्षित युवा को विशिष्ट कार्यों के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करने की आवश्यकता है। आज की प्रतिस्पर्द्धी एवं उच्च तकनीक वाली दुनिया में स्कूल अथवा कॉलेज की सामान्य शिक्षा संभवतः युवाओं के लिए रोजगार सुनिश्चित नहीं कर पाएगी। इसलिए समुचित एवं पर्याप्त कौशल विकास एवं प्रशिक्षण की आवश्यकता है, जो इस शक्ति को तकनीकी कौशल वाले सबसे बड़े मानव संसाधन स्रोत में बदल सकेगी। सरकार द्वारा आरंभ किया गया कौशल भारत अभियान ऐसा ही एक कार्यक्रम है, जो युवाओं को रोजगार बाजार की मांग के अनुसार कौशल बढ़ाने में मददगार होगा। अभियान का लक्ष्य 2022 तक 40 करोड़ से अधिक लोगों को कौशल प्रदान करना और उन्हें उनकी पसंद के कौशल का प्रशिक्षण देकर रोजगार के लिए उनकी योग्यता बढ़ाना है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत कौशल विकास करने वाले दूरस्थ शिक्षा पाठ्यक्रम भी आते हैं।
अंत में युवाओं को सशक्त करने का अर्थ उन्हें लाभप्रद रोजगार प्रदान करना है। रोजगारविहीन युवाओं का देश अर्थव्यवस्था पर बोझ और समाज के लिए खतरा हो सकता है। इसलिए पिछले कुछ समय में सरकार को जोर स्टार्ट अप इंडिया और स्टैंड अप इंडिया कार्यक्रमों के जरिए स्टार्ट अप को बढ़ावा देने पर रहा है। मुद्रा, सेतु, एवं अटल इनोवेशन मिशन कुछ ऐसे कार्यक्रम हैं, जिनका उद्देश्य नवाचार एवं उद्यमशीलता की संस्कृति को बढ़ावा देना है।
युवा राष्ट्र निर्माण के स्तंभ हैं। उनके हाथों में भाग्य बदल देने की शक्ति होती है। अपना भाग्य बदलने के लिए प्रयत्नशील प्रत्येक देश के पास इस अद्भुत संसाधन की ऊर्जा एवं महत्वाकांक्षाओं का उपयोग करने के रास्ते और तरीके होने चाहिए। फैंकलिन रूजवेल्ट ने एक बार कहा था, ‘‘हम हमेशा अपने युवाओं का भविष्य निर्माण नहीं कर सकते, लेकिन हम भविष्य के लिए अपने युवाओं का निर्माण कर सकते हैं।’’

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